काश! हम सभी अंधे हो जाएं...
हाथों में हाथ डाले एक मानव शृंखला चले जा रही है। काले चश्मे लगाए ये बच्चे एक-दूजे का सहारा बने हैं। वो देख नहीं सकते। मैं देख सकता 
उनका गीत 'इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना' दिल को छू गया। समझ नहीं आ रहा था-एक तरफ हम 'सर्वशक्तिमान' बनने की होड़ में हैं और ये नि:शक्त बच्चे बस विश्वास बरकरार रखने के लिए ही शक्ति क्यो मांग रहे हैं? ...हे भगवान, इन्हें शक्ति दे, इन्हें शक्ति दे। इन्हें सर्वशक्तिमान बना दे।
उसका नाम नहीं पता। पूछा भी नहीं। जुबां खामोश मगर शरारती आंखें और चेहरे के भाव खूब 'शोर' मचा रहे हैं। स्टेज पर परफॉर्मेंस के लिए बेताब उस मूक-बधिर लड़की के पैर थिरक रहे हैं। मालूम नहीं कौनसा संगीत उसको सुनाई दे रहा है? मैं भी वही संगीत सुनना चाहता हूं, मगर सुन नहीं पा रहा। शायद शोर बहुत है।
5 टिप्पणियां:
kash ham sab bhi aise sochne or likhne lag jayein...
in bachon ki bhawnao ko bahut sunder shabdon mein sanjoya hai aapne...
my best wishes
tinka-tinka, zara-zara...
jaane man kyu h, bhara-bhara...
बहुत अच्छा लिखा हैं आपने.
इनकी पीड़ा हम तक पहुंचाने के लिए धन्यवाद.
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aankhen nam ho gayin!
brought tears to my eyes;very disturbing and touching!After reading all the posts,I can say how lucky your mother is to have you as a son.You have been beautifully brought up!!!!!HATS OFF TO YOUR MOTHER!!!Aunty ko batana zarur Tarun.
Vandana.
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