20 अक्टूबर 2008: कहते हैं कि जिस दुआ में शब्दों का भार नहीं होता वो भगवान के दर पर सीधे दस्तक देती है. शायद आपकी एक मौन दुआ चमत्कार के लिए मुन्तजिर बेबस माँ की आँखों के आंसुओं के झरने को कुछ कम कर दे. सीता देवी के कमाऊ बेटे राजेन्द्र सिंह की ज़िन्दगी एक्सीडेंट के बाद से ही बेड पर सिमट कर रह गई है. इलाज के लिए यह परिवार अब तक लगभग ३ लाख रूपये खर्च कर चुका है. हाल ये है कि परिवार के पास हॉस्पिटल में भर्ती राजेन्द्र को डिस्चार्ज करवाने के लिए भी पैसा नहीं है. राजेन्द्र की पूरी देह जवाब दे चुकी है. उसकी अशक्त और निरीह आँखें इस मंजर को सिर्फ देख रही हैं. दोस्तों, मैंने तो शब्दों भरी दुआओं के ज़रिये खुशियों में जान फूंकने का प्रयास किया है. बस, ज़रूरत है आपकी एक मौन दुआ की...
7 टिप्पणियां:
हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.
वर्ड वेरिपिकेशन हटा लें तो टिप्पणी करने में सुविधा होगी. बस एक निवेदन है.
डेश बोर्ड से सेटिंग में जायें फिर सेटिंग से कमेंट में और सबसे नीचे- शो वर्ड वेरीफिकेशन में ’नहीं’ चुन लें, बस!!!
इस नए चिटठे के साथ चिटठा जगत में आपका स्वागत है । आशा है कि आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को मजबूती देकर पाठको का ज्ञानवर्द्धन करेंगे। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ है।
हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत। शुभकामनाएं ।
सुंदर प्रवाह से युक्त लेखन स्वागत है आपका चिठ्ठा जगत में. समय निकल कर मेरे ब्लॉग पर दस्तक दे
अद्भुत प्रवाह से सयुंक्त गंभीर भावाभिव्यक्ति से ओतप्रोत रचना
Waaaw! Great. ब्लोगिंग जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. लिखते रहिये. दूसरों को राह दिखाते रहिये. आगे बढ़ते रहिये, अपने साथ-साथ औरों को भी आगे बढाते रहिये. शुभकामनाएं.
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साथ ही आप मेरे ब्लोग्स पर सादर आमंत्रित हैं. धन्यवाद.
एक ब्लॉग लिखकर भूल गया तरुण, आगे भी तो कुछ लिख...
तरुण में सिर्फ शुभकामनयें दे सकती हूँ ...वाणी विलास के अलावा शायद कुछ भी करने में समर्थ नहीं..पर दुईँ हैं उन्सबके लिए जो विपरीत परिस्थिथि में भी जीवंत हैं......मेरा प्रणाम है उनकी जिजीविषा को...और तहे दिल से आपके लिए भी शुभकामनायें ...
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